श्री हनुमान मंदिर सारंगपुर... भूतों का अंत | Indian Horror Stories

श्री हनुमान मंदिर सारंगपुर… भूतों का अंत

hanuman mandir sarangpur

कुणाल की एक बहन है, सीमा। उसकी शादी हो गयी है और वो अपने ससुराल यानी के जोधपुर में रहती है। उसके २ बेटे है एक १२ साल का और एक ७ साल का। सीमा के ससुराल वाले अच्छे लोग नहीं थे। उसको एक नौकरानी की तरह से रखते थे। एक कूड़ा समान उसकी इज़्ज़त करते थे। बेचारी बहुत सहन करती थी। वो लोग उसको हमेशा प्रताड़ित और अपमानित किया करते थे। तब भी वो अपने लोगों को और अपने रिश्तों को संभालकर रखती थी। बहुत ही गुणवान और सुशील लड़की है सीमा, पर उसके ससुराल वाले उसका बहुत छल करते थे। इस वजह से सीमा बेहद परेशान रहा करती थी।

यह करीबन ५ साल पहले की बात है। अचानक सीमा बीमार पड़ गयी। उसको बुखार आया और उसको बहुत कमज़ोरी सी लगने लगी। डॉक्टर की दवाई लेके वो उस दिन तो अच्छा महसूस कर रही थी, पर २ दिन के बाद फिर से उसका बुखार और बदन दर्द शुरू हो गया। कुछ दिनों बाद और भी तबीयत खराब होने लगी। धीरे धीरे उसकी खराब सेहत के चलते वो घर पर ही रहा करती थी। कहीं बाहर जा नहीं पाती थी। उसके ससुराल वाले उसका ख़याल भी नहीं रखते थे।

किसी को समझ ही नहीं आ रहा था के इतने सारे इलाज के बाद भी कुछ असर क्यों नहीं हो रहा था। उसको लगातार थोड़ी थोड़ी देर में पेट दर्द होता था और पैर भी दर्द करते थे, इस कारण वो चल भी नहीं पाती थी।

एक दिन कुणाल के घर पर गृह शांति की पूजा रखी थी। सब परिवार वालों को आना ज़रूरी था। स्वाभाविक है की सीमा के परिवार को भी बुलाया था। सीमा के पति उसको लेके पूजा में आए। सब लोग सीमा को इतने सालों बाद मिलके खुश हुए, साथ ही उसकी बुरी सेहत को लेके चिंतित भी थे। सब लोग अपने अपने डॉक्टर्स के नंबर सुझाने लगे ताकि सीमा का अच्छे से अच्छा इलाज करवा सके। थोड़ी ही देर में पूजा शुरू होने समय था। सब लोग प्रार्थना के लिए खड़े हो गये। सीमा सबसे पीछे खड़ी थी। जैसे ही पंडित जी ने मंत्र पढ़ना शुरू किया, सीमा कुछ अजीब तरीके से हिलने लगी। उसके पैर बुरी तरह से थरथराने लगे। उसकी आँखे जलद गति से गोल गोल घूमने लगी।

सब लोग सीमा का ऐसा रूप देखकर डर गये। एक ने उसको कुर्सी लाकर दी और उसको बिठाया। दूसरे ने तुरंत पानी ला कर उसको पिलाया। कोई उसके हाथ अपने हाथों से घिस कर उसको गर्मी देने की कोशिश कर रहा था, तो कोई उसके सर को सहलाके उसको शांत करने की कोशिश कर रहा था।

सीमा का भाई कुणाल और उसके पिताजी ने सीमा की इस स्थिति का अवलोकन किया। तब कड़ी से कड़ी मिलाते हुए उनको समझ में आ गया की ये कोई बीमारी नहीं है जिसका डॉक्टर से इलाज किया जा सके। सीमा पर किसी भूत का साया पड़ गया है। शायद कोई बुरी शक्ति है जो सीमा को परेशानी दे रही है। उस शक्ति की वजह से ही, जैसे ही मंत्र जाप शुरू हुआ, सीमा का रंग ढंग अलग हो गया।

उन लोगों ने तुरंत ही एक तांत्रिक को बुलाया और सीमा की परिस्थिति के बारे में बताया। वो तांत्रिक आए और उन्होंने देखा। सीमा को देखके वो थोड़ा सहम गये। उन्होंने कहा, “इस लड़की में ५ आत्मायें हैं। वो सब इस लड़की को परेशान कर रहे हैं। वे सब बेहद ख़तरनाक हैं। वे इस शरीर को कभी छोड़ेंगे नहीं। परंतु एक छोटा सा उपाय है…. ये लो मंत्र जाप किया हुआ धागा, और इस लड़की को बांधो। ये आत्मायें इस लड़की में शरीर से दूर रहेंगी.”

कुणाल ने वो धागा लेके सीमा को थोड़ा बहला फुसला के उसके हाथ पर बाँध दिया। तब जाके सीमा शांत हुई। उस दिन के बाद सीमा एकदम से अच्छी रहने लगी। उसकी सेहत भी सुधरने लगी। वो करीब २० दिन तक अपने मायके में ही रही। धागा बाँधने के बाद कभी भी उसके शरीर में कोई आत्मा नहीं आई। सब लोग सीमा के लिए खुश थे। सीमा भी अपने दैनिक जीवन में काफ़ी खुश रहने लगी।

२० दिन के बाद सीमा को अपने ससुराल जाना पड़ा। सीमा अपने पति और बच्चों के साथ जोधपुर (राजस्थान) लौट गयी। अपने घर जाते ही सीमा की सास ने सीमा के हाथ पर बँधा धागा निकल कर फेंक दिया।

जैसे ही वो धागा निकाला, फिर से वे ५ भूत सीमा में प्रवेश कर गये। सीमा की हालत फिर से खराब होने लगी। वो रोज़ अजीब तरीके से बर्ताव करने लगी। कभी वो विशाल कक्ष के बीचों बीच जाकर अचानक से बैठ जाती, कभी वो बाल खोलके जोरो से गर्दन घूमती, कभी उसकी आँखें लाल-लाल हो जातीं, तो कभी वो ज़ोर ज़ोर से चिल्लाया करती थी। उसके बच्चे भी सीमा के इस रूप को देखके उसके पास जाने से डरने लगे।

आस पड़ोसवाले लोग बातें बनाने लगे। सीमा के ससुराल वालों ने तो उसको पागल तक घोषित कर दिया था। इसलिए उन्होंने सीमा को एलाज़ के लिए एक बाबाजी के आश्रम भेज दिया। उसे आश्रम में ही छोड़के वो लोग वापस आ गये। वहाँ पे सीमा को कोई भी फोन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं थी। ससुराल वालों का तो सीमा को आश्रम में ही छोड़ने का इरादा था। बेचारी वहाँ अकेली ही बहुत दिनों तक रही।

उसके ससुराल वाले सीमा को उसके बाद कभी भी मिलने नहीं गये। कोई उसके बारे में पूछने वाला भी नहीं था। एक तरीके से बला टली ऐसा समझ कर सब लोग अपनी दुनिया में मस्त थे। तब एक दिन सीमा ने चोरी छुपे वहाँ के लॅंड लाइन से घर पे फोन किया। किसीने भी फ़ोन नहीं उठाया। उसको लगा की शायद सब बाहर गये होंगे। तब उसने अपने पति को फ़ोन किया और अपनी परेशानी बताई।

वो बोला, “आता हूँ कुछ दीनो में। थोड़ा सबर कर लो।” पर बहुत दिन बीत गये, वो नहीं आया। तभी सारी उम्मीदें हारकर उसने फिरसे चुपके से अपने भाई को फोन किया और कहा, “मुझे इधर आश्रम में रखा गया है। मुझसे मिलने कोई भी नहीं आता। मुझे बहुत मरते है इधर के लोग। मुझे समझ में नहीं आता मुझे यहाँ क्यूँ रखा गया है और मुझे ये लोग क्यूँ मारते हैं। मुझे ये लोग खाना भी नहीं देते। एक हफ्ते से खाना भी नहीं खाया मैने। भैया, मुझे यहाँ से ले चलो। नहीं तो मैं मर जाउंगी।”

ये सुन कर तो कुणाल के पैरों तले ज़मीन खिसक गयी। वो और उसका चचेरा भाई तुरंत ही गाड़ी लेके राजस्थान के उस आश्रम की ओर निकले। कुणाल बिना एक पल भी सोए लगातार गाड़ी चला रहा रहा। अगले दिन वो लोग आश्रम पहुँच गये। कुणाल ने उन आश्रम के लोगों पे बहुत चिल्लाया। पर ज़्यादा वक़्त बर्बाद ना करते हुए उसने सीमा को लेके तुरंत वहाँ से निकल जाना ठीक समझा। उसने सीमा के ससुराल वालों को ज़रा सी भनक भी नहीं लगने दी की वो सीमा के लेके जा रहा है।

कुणाल ने सीमा से कहा, “चल, हम लोंग ड्राइव पे जाते हैं।” सीमा बहुत थक गयी थी, इसलिए उसने कुछ कहा नहीं। सीमा को बहुत जोरों की भूख लगी थी। उसने जो मिला वो जल्दी से खा लिया और गाड़ी में ही सो गयी। पर कुणाल का प्लान कुछ और ही था। वो उसे श्री हनुमान मंदिर सारंगपुर लेके जा रहा था।

कुणाल को सीमा के अंदर के ५ भूतों की पूरी तरह से खबर थी। उन्होंने सीमा की स्थिति बेहद बदतर कर दी थी और श्री हनुमान मंदिर सारंगपुर में जाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था सीमा को उन भूतों से बचाने के लिए। इसलिए कुणाल पूरी तय्यारी से सीमा के यहाँ आया था।

सीमा सोती रही और कुणाल बिना रुके बिना सोए गाड़ी चलता रहा। कुछ देर के बाद सीमा की नींद खुली। उसने पूछा, “हम कहा जा रहे हैं?” कुणाल ने कहा, “हम हमारी मासी के घर जा रहे हैं।” फिर कुणाल ने सीमा को पूछा की, “तुझे ठीक नहीं लग रहा है क्या? उल्टी जैसा हो रहा है?” उसने कहा, “हाँ”, तो जानबूझकर उसको नींद की गोली खिला दी और वो फिर से सो गयी।

कभी भी भूत चढ़े हुए व्यक्ति को यह बताना नहीं होता की तुम उसे किसी मंदिर या धार्मिक स्थल पे ले जा रहे हो, क्योंकि उसके अंदर के भूत कुछ ना कुछ करके पीड़ित व्यक्ति को अंदर जाने नहीं देते। वे अपनी पूरी ताक़त लगा देते हैं की पीड़ित व्यक्ति अंदर ना जा पाए।

कुछ सालों पहले की बात है। एक रोज़ सीमा बहुत बीमार रहने लगी। इन भूतों की वजह से वो बेचारी के शरीर को बहुत सहना पड़ता था। सीमा अलग अलग आवाज़ें नकाला करती थी। एक रात कुणाल और सीमा के कज़िन्स ने सीमा को गाड़ी में बिठाया और एक तांत्रिक के पास लेके जा रहे थे। गाड़ी शुरू होते ही सीमा ने पूछा, “हम कहा जा रहे हैं?” तब किसीने ग़लती से बता दिया, “तुझे एक बाबा के पास लेके जा रहे हैं।” यह सुनके वो चौकन्ना हुई। अचानक से स्तब्ध होके बैठ गयी, ना हिल रही थी ना कुछ। जैसे ही बाबा के मंदिर पे पहुँच गये, कुणाल ने सीमा को गाड़ी से उतरा और बाबा के पास लेके गये। वहाँ सीमा पे तंत्र मंत्र का प्रयोग हुआ, और कुणाल सीमा को वापस गाड़ी में बिठा कर लेके घर आए।

दूसरे दिन से सीमा वैसे ही, बल्कि और ज़्यादा ख़तरनाक बन गयी थी। कुणाल सोच में पड़ गया के ऐसा क्यूँ हो रहा है। कल ही तो हम तांत्रिक बाबा के पास लेकर गये थे और आज फिर से ऐसा क्यों हो रहा है। फिर कुणाल ने एक दूसरे बाबा को अपने घर ही बुला लिया और सब बताया। तब वो बाबा ने सीमा के भूत से बुलवाया, “बता, तुझे कल भगाया था ना। तू गया क्यूँ नहीं?” तो सीमा के अंदर का भूत बोला, “हा हा हा!!! ये लोग सिर्फ़ इ्स शरीर को लेके उधर गये और वापस आए। पर मैं………. मैं तो उस गाड़ी में ही बैठा रहा। हा हा हा….और जैसे ही ये लड़की वापस गाड़ी में बैठ गयी, मैं फिर से इसके शरीर में घुस गया…. हा हा हा हा। मैं इसको नहीं छोड़ूँगा… कभी नहीं।” और सीमा बेहोश हो गयी।

ये किस्सा ध्यान में रखकर ही कुणाल पूरी तय्यारी से और पूरी तरह से सतर्क रहकर सारंगपुर हनुमान मंदिर की ओर गाड़ी चलता रहा था। कुणाल ने पहले से ही गाड़ी के दरवाजे का चाइल्ड लॉक लगाके रखा था की किसी भी वक़्त सीमा दरवाज़ा खोलकर भाग ना जाए।

अब कुणाल की गाड़ी मंदिर के नज़दीक बढ़ने लगी और अचानक से सीमा जग गयी। थोड़ी डरी हुई आवाज़ से उसने कहा, “कुणाल, कहाँ पहुँचे हम लोग। ये कौनसी जगह है?” तो कुणाल के चचेरे भाई ने सीमा के ध्यान भटकाया। उसको दायीं तरफ इशारा करके उसका ध्यान दायीं ओर कर दिया और कुणाल ने तुरंत ही गाड़ी बायीं तरफ मंदिर के द्वार के अंदर घुसा दी।

जैसे ही गाड़ी ने मंदिर के द्वार के अंदर प्रवेश किया, सीमा का रंग ढंग ही बदल गया। वो एकदम से डरी सहमी सी हो गयी। इधर उधर देखने लगी, थरथराने लगी। उसके चेहरे पे पसीना आ गया।

श्री हनुमान मंदिर सारंगपुर बहुत पुराना मंदिर है। वहाँ पे हर शनिवार को आत्मा से अधीन पीड़ित लोगों की लंबी कतार लगती है। यहाँ ऐसी मानता है की भगवान हनुमान के इस पावन मंदिर में कोई भी बड़े से बड़ा ख़तरनाक शक्तिशाली भूत हो, यहाँ पे आके इंसान का शरीर छोड़ देता है और मुक्ति पाता है। बहुत लोग यहाँ पे बड़ी आस्था और उम्मीद से आते हैं।

इसी उम्मीद से ही कुणाल सीमा को लेकर इस मंदिर में आया था। यहाँ पे लोगों को ठहरने के लिए न्यूनतम किराए पे कमरे भी उपलब्ध हैं। कुणाल और साथी रात को मंदिर में पहुँच गये थे तो उन्होंने एक कमरा लिया। मंदिर का एक कर्मचारी आया, उसने कमरे का दरवाज़ा खोल कर कुणाल के हाथ में कमरे की चाबी दे दी। वो लोग सीमा को अंदर लेके गये। कुणाल ने कर्मचारी से पूछताछ की, “कल कितने बजे पंडित जी के पास जाना है हमको?” उस कर्मचारी ने सब जानकारी बता दी। कुणाल का नंबर कल सुबह का था, ये सुनकर कुणाल ने थोड़ी राहत की सांस लेते हुए कहा, “चलो ठीक है, अभी बहुत रात हो गयी है। और मैं भी पिछले ४ दिनों से सोया नहीं हूँ। थोड़ी देर सो जाता हूँ।”

“ऐसी ग़लती बिल्कुल भी मत करना।”, उस कर्मचारी ने कहा, “एक बार जो तुम सो गये, तो इस मौके का लाभ उठाकर ये बहन यहाँ से भाग जाएँगी। ऐसे क़िस्से यहाँ पे बहुत बार हुए हैं की लोग पीड़ित व्यक्ति को यहाँ पर बड़ी दूर से लेके तो आते हैं और रात को सो जाते हैं और पीड़ित व्यक्ति कमरे से भाग जाती है फिर कभी भी वापस नहीं आती। परिवार वालों को कभी जिंदगी में वो कितना ढूँढने पर भी वो नहीं मिलती। इस लिए रात भर आपको जगके पहरा देना है। वो कितना भी छल कपट करके कमरे से बाहर निकालने की कोशिश करेंगी, उनको जाने नहीं देना है। सुबह होते ही मैं आपको लेने आऊंगा। तैयार रहिएगा। शुभ रात्रि।”

बेचारा कुणाल उस रात भी नहीं सो पाया। रात भर पहरा देते हुए कुछ घंटो के बाद सुबह हो गयी। वो कर्मचारी उनको लेना आ गया। सीमा अंदर ही बैठी थी। कुणाल ने अंदर आके सीमा को कहा, “चलो उठो सीमा, हमको जाना है।” सीमा नहीं उठी। तो कुणाल ने उसकी एक बाह पकड़के उसके उपर उठाने की कोशिश की। जैसे तैसे करके वो खड़ी हो गयी। अब कुणाल सीमा आगे चलने के लिए हाथ पकड़के खिच रहा था, पर वो रत्ती भर भी अपनी जगह से हिली नहीं।

बहुत कोशिशों के बाद हारकर कुणाल ने एक व्हील चेयर मँगवाई ताकि सीमा को उसपे बिठा कर ले जाए। मंदिर के कर्मचारी व्हील चेयर लेके आए। कुणाल ने सीमा को व्हील चेयर पे जैसे तैसे बिठाया। अब उसने व्हील चेयर को धकेलने की कोशिश की, वो व्हील चेयर एक इंच भी ना हिली। सीमा ज़ोर ज़ोर से हसने लगी। सब डर गये। कुणाल ने हिम्मत रखके और दो कर्मचारियों को बुलाया, और सीमा को उठाके सीधे मंदिर के अंदर लेके गये।

सारंगपुर हनुमान मंदिर के अंदर हनुमान जी की मूर्ति के बिल्कुल सामने एक लाल चौकोन बनाया गया है। उसमे पीड़ित व्यक्ति को बैठाया जाता है। एक बार पीड़ित व्यक्ति उस चौकोन में बैठ गयी, वो बँधी हो जाती है और मंदिर के पुजारी अपनी तांत्रिक विद्या से उस शरीर में से भूत को निकाल देते हैं। फिर मंदिर में ही एक कुंड है, उन आत्माओं को ये शरीर छोड़कर उस कुंड में विलीन होने का आदेश देते हैं। उन भूतों को उस आदेश का पालन करना अनिवार्य होता है अन्यथा उनको कड़ी सज़ा मिलती है।

सीमा को ये चार लोग उठा के जैसे जैसे उस लाल चौकोन के नज़दीक लेके जा रहे थे, सीमा ज़ोर ज़ोर से झटपटाने लगी। पर चारो लोगों ने अपनी पकड़ एकदम मज़बूत रखते हुए सीमा को लाल चौकोन में लेजा कर के बिठा दिया।

वहाँ बैठते ही सीमा के बाल खुल गये, और वो ज़ोर ज़ोर से गुर्राने लगी। पंडित जी ने पवित्र पानी उसके चेहरे पर मारा। सीमा ग़ुस्से में झटपटाई और ज़ोर से गुर्राने लगी।

पंडित जी ने सीमा के हाथ में अगरबत्ती पकड़ाकर उसको कहा, “हनुमान जी की सौगंध खाके कहो के हम सारे भूत इस शरीर को छोड़कर, उस कुंड में जाकर मुक्ति पाएँगे।” सीमा ने गुस्से से पंडित जी पर अगरबत्ती फेंक दी और ज़ोर से चिल्लाई, “नहीं…..” पंडित जी ने फिर से वो पवित्र जल सीमा के मूह पे मारा। सीमा झटपटाई और अलग अलग आवाज़ें निकालने लगी, “मैं इसको नहीं छोड़ूँगा। गर्र्र्रर्र्र्र गर्र्र्र गर्र्र्रर्र्र्र” पंडित जी ने ज़ोर से उसके बाल पकड़े और खींचे। सीमा दर्द में ज़ोर से चिल्लाई, “आह…” पंडित जी ने तब फिर से उसके हाथ में अगरबत्ती पकड़ाई और कहा, “मेरे पीछे दोहराओ, में एक मैली आत्मा, सारंगपुर के हनुमान जी की सौगंध खा के कहती हूँ, की मैं इस शरीर को हमेशा हमेशा के लिए छोड़कर, उस कुंड में विलीन होकर मुक्ति पाऊँगी।”

हनुमान जी की पवन शक्तिशाली ताक़त के आगे इतने सारे भूत भी कुछ ना कर पाए और वो सीमा के शरीर को छोड़कर कुंड में चले गये।

पंडित जी ने कुणाल को एक धागा दिया, और कहा की ये उसके हाथ में हमेशा बाँध के रखना। इस लड़की के अंदर के भूत बहुत ख़तरनाक थे। ये धागा उसकी हमेशा रक्षा करेगा। आगे भी अगर तुमको ज़रा सा भी कुछ लगे की फिरसे ये ऐसा बर्ताव कर रही है, उसको तुरंत यहाँ पे लाना है तुमको।

कुणाल ने सीमा के हाथ पे वो धागा बाँधा और सीमा एकदम से साधारण हो गयी। फिर कुणाल उसको अपने घर लेके आया। अब सीमा अपने मायके ही रहती है। सीमा की ज़िंदगी एकदम अच्छी चल रही है।

Spread the horror