सावधान, छोटी बेटियों !!! | Indian Horror Stories

सावधान, छोटी बेटियों !!!

यह कहानी मेरी एक फ्रेंड की है और सच्ची घटना पर आधारित है। मेरी फ्रेंड किर्ति, एक चॉल में रहती थी। हर सुबह वह जल्दी उठकर अपनी माँ की घर के कामों में मदद करती और फिर तैयार होकर अपनी बड़ी बहन के साथ स्कूल के लिए निकल जाती। दोनों बहनें स्कूल साथ ही जाया करती थीं।

एक दिन ऐसे ही किर्ति जब स्कूल जा रही थी तो गलती से उसका पाँव एक नींबू पर पड़ गया। नींबू पर सिंदूर लगा था और उसपे कुछ कीलें भी गाड़ि हुई थी। किर्ति अपनी बहन से बातें करने में इतनी मशगूल थी कि उसे पता ही नहीं चला कि कब उसका पैर उस नींबू पे जा लगा।

किर्ति यूं ही अपनी बहन से बात करते चली जा रही थी कि तभी उसे बहुत कमज़ोरी लगने लगी। उसे चक्कर सा आने लगा। तब उसकी बहन ने उसे स्कूल ले जाने की बजाय उसे वापस घर ले जाना ही उचित समझा।
घर पहुँचते ही किर्ति ने एक तरफ अपना बैग फेंका और दूसरी तरफ अपने जूते। उसकी माँ उसकी यह हरकत देख हैरत में पड़ गयी। तभी किर्ति कमरे के बीच में पालथी मारकर बैठ गयी। माँ ने उसकी बहन से पूछा कि क्या हुआ, तो बहन ने बताया कि स्कूल जाते वक़्त किर्ति अचानक कमजोर महसूस करने लगी, इसीलिए वो दोनों वापस घर आ गयें।

माँ ने किर्ति से बात करने की कोशिश की। उसे ज़ोर से हिलाया और पूछा, “किर्ति, क्या हुआ तुझे? कोई परेशानी है क्या बेटा? तबीयत तो ठीक है न तेरी?”
किर्ति ने कोई जवाब नहीं दिया और माँ की ओर गुस्से से ताकने लगी। यह देख उसकी माँ काफी डर गयी।
माँ ने सोचा इस बारे में उसे बाबाजी से बात करनी चाहिए। बाबाजी किर्ति के घर के पास ही रहते थे। वे पहुंचे हुए तांत्रिक थे और बहुत लोगों की उन्होने मदद की थी। माँ दौड़ते हुए बाबाजी के घर गयी और उन्हें किर्ति की अजीब हरकतों के बारे में बताया। बाबाजी ने किर्ति को उनके पास लाने को कहा।
किर्ति की बहन और माँ किसी तरह किर्ति को घसीटते हुए बाबाजी के पास लेकर आयें। किर्ति आना नहीं चाहती थी। जब वो लोग बाबाजी के घर पहुंचे तो किर्ति घर का दरवाज़ा पकड़कर खड़ी हो गयी। माँ ने ज़ोर देकर किर्ति को घर के अंदर धक्का देने की कोशिश की, मगर किर्ति टस से मास नहीं हुई और वहीं खड़ी रही।

बाबाजी यह सब देख सब समझ गयें। उन्होने माँ से कहा कि वो किर्ति को लेकर वापस घर ले जाएँ। वो वहीं आकर उसे ठीक करेंगे। माँ और बहन किर्ति को वापस घर लेकर आ गयें। दो मिनट में बाबाजी भी वहाँ पहुँच गयें।

बाबाजी ने किर्ति के चारों ओर चावल से एक घेरा बनाया। किर्ति यह देख अपने दाँत किटकिटाने लगी। इसके बाद बाबाजी ने अपने झोले में से एक भस्म निकाली और किर्ति के माथे पर लगा दी। किर्ति के अंदर से एक छोटी बच्ची का भूत अलग-अलग आवाज़ों में ज़ोर-ज़ोर से चीखने-चिल्लाने लगा। बाबाजी ने पूछा, “कौन हो तुम? इस बच्ची को क्यों परेशान कर रही हो?”

प्रेतात्मा ने कोई जवाब नहीं दिया, सिर्फ हाथों से अजीब-अजीब इशारे करती रही, जिसे कोई नहीं समझ पा रहा था। बाबाजी ने किर्ति कि माँ से एक बड़ी थाली में चावल भरकर लाने को कहा। थाली को बाबाजी ने किर्ति के सामने रख दिया और
प्रेतात्मा से बोले, “तुम्हें, जो भी चाहिए, इन चावलों पर लिखो।”

तब प्रेतात्मा ने अपनी पूरी कहानी लिखना शुरू की। उसने चावल पर लिखा कि वह एक ५ साल की बच्ची थी। उसकी सौतेली माँ ने उसे कई दिनों तक भूखा रखा, कुछ खाने को नहीं दिया जिससे उसकी मौत हो गयी। वो बहुत भूखी थी। वो चाहती थी कि कोई उसे माँ की तरह प्यार से खिलाये।

वो एक छोटी बच्ची का भूत था और वो माँ के प्यार के लिए तरस रही थी। ये समझते ही किर्ति की माँ दौड़कर रसोई में गयी और स्वादिष्ट खाना थाली में सजा के ले आई। उन्होने उसे अपने हाथों से खाना खिलाया। प्रेतात्मा सारा का सारा खाना खा गयी। वो खाना खाके संतुष्ट लग रही थी और हल्के-हल्के मुस्कुरा भी रही थी। थोड़ी ही देर में उसने किर्ति का शरीर छोड़ दिया और हमेशा के लिए चली गयी।

अगले दिन तक किर्ति बहुत बीमार रही। लेकिन उसके बाद वो बिल्कुल ठीक हो गयी और पहले की तरह अपना जीवन बिताने लगी।

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