एक था रिक्शा वाला - Story of a pure soul | Indian Horror Stories

एक था रिक्शा वाला

Sundeep a pure soul

सुबह-सुबह रत्नागिरी पहुंचकर राजीव अंकल और रजनी आंटी बहुत खुश थें। रत्नागिरी की आब हवा की बात ही और थी। लेकिन अब दिक्कत यह थी कि इतनी सुबह स्टेशन पर कोई रिक्शा नहीं मिल रहा था।

राजीव अंकल और रजनी आंटी आपस में बात करने लगे कि तभी एक रिक्शा उनके पास आकर रुका। रिक्शा वाले को देखकर आंटी और अंकल चौंक गएँ क्योंकि यह तो उनके गाँव के पड़ोस में रहने वाला संदीप था। संदीप को देखकर अंकल-आंटी को हैरानी के साथ-साथ ख़ुशी भी हुई। अंकल-आंटी रिक्शा में बैठ गए और रिक्शा चल पड़ा।

समय काटने के लिए अंकल संदीप से बतियाने लगें। “ बेटा संदीप, और कैसा चल रहा है? घर में सब ठीक-ठाक? तुम्हारी बेटी कितने साल की हो गयी?”

“छ साल की हो गयी काका”, संदीप ने जवाब दिया।

“तब तो स्कूल जाती होगी?”

“हाँ, जाती है ना। बहुत मन लगाकर पढ़ती है।”

“यह तो बहुत अच्छी बात है, उसको खूब पढ़ो-लिखाओ और काबिल बनाओ।”

“हाँ, काका, मेरी तो यही इच्छा है कि वो खूब पढ़े-लिखे। लेकिन अब उसे अपने आपको बहुत संभालना होगा। छोटी उम्र में ही उसे खुद अपना ख्याल रखना होगा। उसे अब पिता के बिना भी जीना सीखना होगा। मैं पहले की तरह उसका साथ नहीं दे पाऊंगा।”

संदीप की बात अंकल को थोड़ी अटपटी लगी। इससे पहले कि वो उससे कुछ बोल पाते, उनका ध्यान रास्ते में पड़ रहे जंगल पर गया। ये देखकर अंकल थोड़े सहम से गए। क्यूँकि उस जंगल के रस्ते में bad और pure soul का वास है ऐसा उन्होंने कहीं सुना था।

“अरे बेटा, तुम हमें इस जंगल के रास्ते क्यों ले आये”? उन्होंने संदीप से पूछा।

“काका, उधर ज़मीन खिसकी है और रास्ता जाम हो गया है, इसीलिए।”

“ओ, अच्छा ! ठीक है, ठीक है, कोई बात नहीं।”

रास्ते भर दोनों गपियाते रहे। बीच-बीच में आंटी भी उनकी गप्पबाजी में शामिल हो जाती।

बातों-बातों में रास्ता आराम से कट गया और अंकल-आंटी का घर भी आ गया। अंकल-आंटी को लेने उनका नौकर घर के बाहर ही खड़ा था। नौकर को देख, अंकल उससे बोले, “ अरे, सोहन, मालूम है तुम्हें, आज तो हम बुरे फंस जाते। सौभाग्य से हमें संदीप मिल गया।”

“अरे संदीप, अन्दर आओ। हमारे साथ चाय पीकर ही जाना,” बोलते हुए अंकल पीछे की और मुड़े। लेकिन यह क्या ? वहां तो कोई था ही नहीं। रिक्शा खाली पड़ा था।

अंकल और आंटी अगल-बगल देखने लगे, लेकिन संदीप का कहीं कोई नामो-निशाँ भी नहीं था। तभी आंटी की नज़र रिक्शा में पड़ी एक चिठ्ठी पर गयी।

“देखिये, यह क्या है”? बोलते हुए आंटी अंकल को लाकर चिठ्ठी पकड़ाती है।

अंकल चिट्ठी खोल पढने लगते हैं।

“आदरणीय काका,

करीब एक घंटा पहले दो लोग मेरे रिक्शा में बैठे थें। उनकी बातों से मुझे पता चला कि वो दोनों किसी को जान से मार डालने की योजना बना रहे थें। जब मैंने उनसे पूछा कि वो दोनों किस बात की योजना बना रहे थें तो दोनों भड़क गए और मुझ पर चीखने-चिल्लाने लगें। मैंने उन्हें पुलिस का डर दिखाया और उनसे बोला कि मैं सब पुलिस को बता दूंगा। इस पर हम लोगों में झड़प शुरू हो गयी। मार-पीट में उनमें से एक बुरी तरह घायल हो गया और भाग खड़ा हुआ।”

“दुसरे को मैंने दो-चार तमाचा और लगाया तो उसने सब सच उगल दिया। उसने आपका नाम लिया और बताया कि आपने किसी ज़मींदार को अपनी ज़मीन बेचने से इन्कार कर दिया था। तो गुस्से में उस ज़मींदार ने आपको और आंटी को मरवाकर आपकी ज़मीन हड़पने के लिए इन दोनों को भेजा था। इतना बोलकर उस गुंडे ने अपना चाकू निकाला और मेरे सीने में उतार दिया। मैं वो आघात सहन नहीं कर पाया और मेरे आत्मा ने उस शरीर का त्याग कर दिया।” उस चिठ्ठी के जरिए वो pure soul अपनी आपबीती सुनाने लगी।

“काका, मुझे अच्छी तरह याद है कि जब मेरी पत्नी मेरी बेटी को जन्म देने वाली थी तो आपने किस तरह अपनी गाड़ी में उसे अस्पताल पहुंचाकर उसकी रक्षा की थी। उस दिन गाँव में दंगा हो रहा था और कोई डर से अपने घर से बाहर नहीं निकल रहा था। ऐसी स्थिति में आपने अपनी जान की परवाह न कर उस दिन शान्ति के प्राणों की रक्षा की और आपकी वज़ह से मुझे पिता बनने का सौभाग्य मिला।”

“मैं कभी आपके इस एहसान को नहीं चुका पता। लेकिन जब मुझे इन दोनों गुंडों की योजना के बारे में पता चला तो मेरी आँखों के सामने वो दिन आ गया जिस दिन शान्ति मेरी बेटी को जन्म देने वाली थी और मैंने इन दोनों गुंडों से आपकी रक्षा करने का निर्णय लिया। इसीलिए मैं आपको जंगल के रास्ते से यहाँ लाया क्योंकि इस रास्ते के बारे में बहुत कम लोगों को पता है।”

“काका, अपना और आंटी का ख्याल रखना और पुलिस से ज़ल्द से ज़ल्द संपर्क कर लेना ताकि वो गुंडे आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाए। और हाँ, हो सके तो शान्ति तक मेरी खबर पहुंचा देना। उससे कहना कि मैं उससे और अपनी बेटी से बहुत प्यार करता हूँ। मैं शरीर से उनके साथ नहीं हूँ तो क्या? मेरी आत्मा हमेशा उनके साथ ही रहेगी और उनका हर तरह से ख्याल रखेगी। मैं कभी भी उन्हें किसी तरह की तकलीफ नहीं होने दूंगा।”

अंकल ने चिठ्ठी पढनी ख़त्म की। वो एक pure soul ही थी जो अपने लोगों की जान ख़तरे में है यह पता चलते ही उनकी सुरक्षा के लिए तुरन्त हाज़िर हुई। अंकल और आंटी की आँखों से आंसू की धारा लगातार बहती जा रही थी।

Spread the horror